अंतरविषयक डेटा अनुसंधान प्रभाग (IDRD), मॉडलिंग, मापन एवं डेटा विश्लेषण के संश्लेषण के माध्यम से, वर्तमान में पृथ्वी विज्ञान, कृषि, स्वास्थ्य सेवा आदि क्षेत्रों में अंतरविषयक डेटा एवं भौतिकी-संचालित अनुसंधान पर केंद्रित है। पृथ्वी विज्ञान में, सीएसआईआर-4पीआई तीन दशकों से अधिक समय से पृथ्वी प्रणाली के चारों भौगोलिक क्षेत्रों (जियोस्फीयर) को समाहित करने वाले अपने विशिष्ट एवं बहु-आयामी उच्च-प्रभाव अध्ययनों हेतु राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है। सीएसआईआर-4पीआई ने वर्ष 1994 से भारत में ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम (GPS) आधारित भू-विज्ञान अनुसंधान की अग्रणी शुरुआत की, जब GPS को पूर्ण रूप से परिचालन योग्य बनाया गया था। हम भारतीय उपमहाद्वीप हेतु नव-निर्धारणवादी (नियो-डिटरमिनिस्टिक) भूकंपीय जोखिम मानचित्र प्रदान करने वाले पहले संस्थान थे। शहरीकरण एवं भूमि उपयोग परिवर्तन के संदर्भ में उच्च-प्रभाव जल-मौसम विज्ञान संबंधी आपदाओं का पूर्वानुमान, सीएसआईआर-4पीआई की एक महत्वपूर्ण गतिविधि है। एक अन्य प्रभावशाली गतिविधि गणितीय मॉडलिंग, डेटा विश्लेषण, अंतरिक्ष-आधारित जियोडेसी आदि का उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं तथा वर्षा, कृषि एवं भारतीय उपमहाद्वीप विशिष्ट स्वास्थ्य जोखिमों पर इसके प्रभाव का अध्ययन है। भारतीय ग्रीष्म मानसून में परिवर्तनशीलता को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों को समझना तथा उनका मात्रात्मक आकलन करना संस्थान के सक्रिय अनुसंधान क्षेत्रों में से एक है। महासागर, वायुमंडल एवं भूमि में कार्बन चक्र पर अध्ययन, पेरिस जलवायु समझौते के संदर्भ में एक अतिरिक्त आयाम जोड़ता है, जो मजबूत कार्बन फ्लक्स आकलन प्रदान कर वायुमंडलीय कार्बन चक्र अनुसंधान में विद्यमान अंतरालों को दूर करने में सहायक हो सकता है। इनमें से अधिकांश अध्ययन राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ घनिष्ठ सहयोग से किए जाते हैं, तथा इन्हें संस्थान की अत्यंत परिष्कृत प्रेक्षणात्मक अवसंरचना, जैसे GNSS नेटवर्क, ब्रॉडबैंड भूकंपीय नेटवर्क, तथा GHG प्रेक्षण नेटवर्क (WMO मानक), का समर्थन प्राप्त है, जो विगत तीन दशकों से देश भर के कई अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। वास्तव में, संस्थान ने 1994 में बैंगलोर में IGS (अंतरराष्ट्रीय GNSS सेवा) स्टेशन स्थापित किया था, जो देश में समस्त भू-विज्ञान अनुसंधान हेतु एक संदर्भ स्टेशन के रूप में कार्य करता है।