वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), भारत का सर्वोपरि औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास संगठन, 1942 में तत्कालीन केंद्रीय विधान सभा के एक संकल्प द्वारा गठित किया गया था। यह सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत एक स्वायत्त निकाय है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सदैव किसी राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का एक प्रमुख चालक रहा है, तथा सीएसआईआर का जन-सामान्य हेतु प्रौद्योगिकियां विकसित करने का एक दीर्घ इतिहास रहा है। इनमें से कई प्रौद्योगिकियां आज भी प्रयोग में हैं। इन प्रौद्योगिकियों को विकसित करने वाले वैज्ञानिक गुमनाम बने रहे; कई तो विस्मृत भी हो गए। तथापि, सीएसआईआर में खोज/आविष्कार की यह विरासत कभी परित्यक्त नहीं हुई।
देश का सर्वोपरि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संगठन, सीएसआईआर, हमारे प्रथम प्रधानमंत्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों से प्रेरणा लेता है, "यह विज्ञान ही है जो भूख एवं गरीबी की समस्याओं का समाधान कर सकता है", तथा अपनी स्थापना से ही जन-सामान्य के लाभ हेतु विज्ञान की शक्ति को साकार करने हेतु प्रतिबद्ध रहा है।
सीएसआईआर का मानना है कि आज पहले से कहीं अधिक, देश की विशाल जनसंख्या की आकांक्षाओं की पूर्ति हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों को तैनात किए जाने की आवश्यकता है। देश की बढ़ती अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, सीएसआईआर ने देश की आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने में सरकार के प्रयासों का समर्थन करने हेतु स्वयं को नए सिरे से तैयार किया है।
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