द्वारा आदित्य एच. अय्यर, कृष्ण चंद्र गौड़ा, अरुणा एस. टी.
मीठा जल (फ्रेशवॉटर) एक अत्यावश्यक संसाधन है, जिसकी मनुष्यों एवं समुदायों को कृषि, अस्तित्व एवं शारीरिक निर्वाह से संबंधित बुनियादी गतिविधियों हेतु निरंतर उपलब्धता की आवश्यकता होती है। जहां नदियां, झीलें एवं भूमिगत जलभृत (एक्विफर) दीर्घकालिक जल स्रोतों के रूप में कार्य करते हैं, वहीं वर्तमान जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण भाग ऐसे क्षेत्रों में निवास करता है जहां जल की विश्वसनीय एवं स्थिर आपूर्ति उपलब्ध नहीं है। इन क्षेत्रों में, निवासियों के अस्तित्व हेतु वर्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है, किंतु यह प्रायः मौसमी अथवा अनियमित होती है। इसके अतिरिक्त, यूनेस्को की रिपोर्टों के अनुसार, विश्व भर में अरबों लोगों को सुरक्षित एवं स्वच्छ जल तक पहुंच प्राप्त नहीं है, जबकि भूमि एवं संसाधनों के अनुचित उपयोग से उत्पन्न सूखे एवं बाढ़ जैसी प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित आपदाएं इस समस्या को और गंभीर बना देती हैं। इन तथा अन्य कई समस्याओं को कम करने हेतु, क्लाउड सीडिंग एक आशाजनक तकनीक है, जो आवश्यकता पड़ने पर वर्षा को प्रेरित करती है अथवा बाढ़ के जोखिम को कम करने हेतु उच्च-तीव्रता वाली वर्षा की अवधि के दौरान इसे निलंबित करती है। यह पूर्वोक्त समस्याओं के समाधान हेतु महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वर्षा जल के प्रवाह को मात्रा एवं क्षेत्र दोनों दृष्टि से नियंत्रित कर सकती है। यह लेख वैज्ञानिक साहित्य एवं पेटेंटों की व्यापक समीक्षा के माध्यम से क्लाउड सीडिंग के मूलभूत सिद्धांतों की पड़ताल करता है, जिसमें इस प्रक्रिया के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत, सीडिंग सामग्रियों एवं प्रक्रियाओं के रासायनिक पहलू, इन्हें क्रियान्वित करने हेतु प्रयुक्त व्यावहारिक विधियां, तथा 1940 के दशक में इसकी संकल्पना के बाद से क्लाउड सीडिंग प्रौद्योगिकी में हुए विकास शामिल हैं।
स्रोत: https://www.ias.ac.in/article/fulltext/reso/031/03/0411-0434