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सीएसआईआर-राष्ट्रीय डेटा विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता संस्थान

(पूर्व में चैथा पैरारडाइम संस्थान तथा गणितीय प्रारूपण एवं कम्प्यूटर अनुकरण केन्द्र)

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक घटक प्रयोगशाला की एक घटक प्रयोगशाला।.


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार

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द्वारा संबित प्रसनजीत नाइक, शिव साई कुमार राजना, संपद कुमार पांडा, चिरंजीवी जी. विवेक एवं देवांशु घिल्डियाल



यह अध्ययन GNSS-आधारित कुल इलेक्ट्रॉन कंटेंट (TEC) प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए, 8 फरवरी 2025 को कैरिबियन सागर में ट्रांसफॉर्म भ्रंश (फॉल्ट) संरचना के अनुदिश Mw 7.6 केमैन द्वीप भूकंप द्वारा प्रेरित सह-भूकंपीय आयनमंडलीय विक्षोभों (CIDs) की जांच करता है। आयनमंडलीय विक्षोभों की जांच के माध्यम से इस विशिष्ट भूकंप घटना के प्रभावों का लक्षण वर्णन करने का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह घटना शांत सौर एवं भू-चुंबकीय परिस्थितियों में घटित हुई। इससे नीचे से स्थलमंडलीय बल द्वारा उत्पन्न आयनमंडलीय विक्षोभों की स्पष्ट पहचान होती है, तथा ठोस पृथ्वी-आयनमंडल युग्मन तंत्रों के संबंध में मूल्यवान जानकारी प्राप्त होती है। इस भूकंप में दो-चरणीय विदर (रप्चर) प्रक्रिया देखी गई, जो एक धीमे प्रारंभिक उप-शियर विदर चरण से आरंभ होकर तीव्र गति से सुपरशियर व्यवस्था में परिवर्तित हुई। इस विदर व्यवहार ने प्रबल भू-गति उत्पन्न करने में सहायता की तथा वायुमंडलीय ध्वनिक-गुरुत्व तरंगें (AGWs) उत्पन्न कीं, जो ऊर्ध्वगामी रूप से प्रसारित होकर आयनमंडलीय ऊंचाई तक पहुंचीं। उल्लेखनीय रूप से, फिल्टर किए गए TEC डेटा ने भूकंप के पश्चात विशिष्ट दोलन (ऑसिलेशन) प्रदर्शित किए, जिसने CIDs के हस्ताक्षरों को स्पष्ट रूप से दर्शाया, जिनका आयाम 0.8 TECU तक पहुंचा। फिल्टर किए गए TEC मानों ने वायुमंडलीय प्रभावों एवं परिवेशी भू-चुंबकीय क्षेत्र के कारण स्थानिक असममिति भी प्रदर्शित की। साथ ही, स्पेक्ट्रल विश्लेषण ने प्रमुख ध्वनिक तरंग आवृत्तियों (2–4 mHz) तथा क्षैतिज प्रसार वेगों (~1.34 किमी/सेकंड) की पुष्टि की, जो सैद्धांतिक ध्वनिक तरंग गतियों के अनुरूप हैं, जिससे भूकंपीय उत्पत्ति वाले आयनमंडलीय विक्षोभों के हस्ताक्षरों की और पुष्टि हुई। ये निष्कर्ष ट्रांसफॉर्म प्लेट सीमा संरचनाओं में भूकंपीय गतिविधि के विश्वसनीय संकेतकों के रूप में CIDs की भूमिका को सुदृढ़ करते हैं, तथा वास्तविक-समय भूकंप निगरानी हेतु GNSS नेटवर्क के संभावित उपयोग को रेखांकित करते हैं।

स्रोत: https://doi.org/10.1007/s12145-026-02134-6