द्वारा एस. के. साहू, कृष्ण चंद्र गौड़ा, एस. हिमेश एवं आर. के. साहू
ओडिशा में मई 2015 के तीसरे एवं चौथे सप्ताह के दौरान लगभग दो सप्ताह तक चलने वाली एक अभूतपूर्व लू (हीट वेव) आई, जिसके परिणामस्वरूप मौसम संबंधी संकट उत्पन्न हुए। इस अध्ययन में, 25-27 मई 2015 को एक चरम तापमान घटना (ETE) दर्ज की गई, जिसमें ओडिशा राज्य के लगभग 15 मौसम प्रेक्षण केंद्रों पर अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जिसके परिणामस्वरूप तीव्र लू की स्थिति उत्पन्न हुई। इस अध्ययन में विभिन्न भूमि-उपयोग परिदृश्यों का उपयोग करते हुए क्षेत्रीय स्तर पर ETE का अनुकरण करने हेतु मेसोस्केल मॉडलिंग फ्रेमवर्क (WRF4.0) को कॉन्फ़िगर एवं अनुकूलित किया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के डेटा पर आधारित वर्तमान भूमि-उपयोग परिदृश्य का उपयोग करते हुए समय-समुच्चय (टाइम-एन्सेम्बल) अनुकरण से प्राप्त अधिकतम तापमान, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम केंद्रों पर अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) डेटा पर आधारित अनुकरणों की तुलना में अधिक सटीक पाया गया। IMD स्टेशन-स्तरीय प्रेक्षणों की तुलना में ओडिशा पर अनुकरित अधिकतम तापमान की औसत प्रतिशत त्रुटियां 25 मई 2015 को क्रमशः 1.6% (इसरो) एवं 3% (USGS), तथा 26 मई 2015 को क्रमशः 4.2% (इसरो) एवं 4.7% (USGS) रहीं। इसरो डेटा (अधिक शहरीकृत) पर आधारित अनुकरण की तुलना में, USGS डेटा पर आधारित अनुकरण में ओडिशा के विभिन्न स्थानों पर अनुकरित क्षैतिज सतही पवन सामान्यतः अधिक पाई गई। भूमि उपयोग में परिवर्तन खुरदरापन लंबाई (रफनेस लेंथ) को बढ़ाता है, जिससे सतही पवन गति में कमी आती है। मॉडल से आर्द्रता, निर्गामी दीर्घ-तरंग विकिरण (OLR), संवहन उपलब्ध क्षमता ऊर्जा (CAPE), एवं संवहन अवरोध (CIN) आदि का विश्लेषण कर गतिकीय पहलुओं की भी जांच की गई है, तथा पुनर्विश्लेषण (reanalysis) उत्पादों के साथ सत्यापन किया गया है, जो क्षेत्रीय लू का कारण बनने वाले अनुकूल वातावरण को दर्शाने में मॉडल के प्रदर्शन का समर्थन करते हैं। भूमि उपयोग विश्लेषण से पता चलता है कि 1992 से 2015 के बीच राज्यव्यापी शहरीकरण में लगभग 0.4% की वृद्धि हुई, जिसमें भुवनेश्वर, संबलपुर, झारसुगुड़ा एवं सुंदरगढ़ जिले के राउरकेला जैसे शहरों में सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जहां मई माह में नियमित रूप से लू की स्थिति उत्पन्न होती है, और अनुकूलित तथा कैलिब्रेटेड मॉडल कॉन्फ़िगरेशन द्वारा इन्हें सटीकता से अनुकरित किया गया है। शहरी विस्तार एवं फसल पद्धतियों में परिवर्तन सहित भूमि-उपयोग परिवर्तन, बढ़ती मानवजनित गतिविधियों के साथ, अधिकतम तापमान में वृद्धि से सीधे जुड़ा हुआ है।
स्रोत: https://doi.org/10.54302/mausam.v77i3.6819