द्वारा पयोश्नी सामंतराय एवं कृष्ण चंद्र गौड़ा
बादल फटना (क्लाउडबर्स्ट) अल्पकालिक किंतु तीव्र वर्षा की घटनाएं हैं, जो विशेष रूप से भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में मानव जीवन, अवसंरचना एवं पारिस्थितिकी तंत्र हेतु महत्वपूर्ण जोखिम उत्पन्न करती हैं। इनकी विनाशकारी विशेषताओं के बावजूद, इनकी स्थानीयकृत प्रकृति, जटिल भू-भाग के प्रभाव, तथा उच्च-विभेदन प्रेक्षणात्मक डेटा की कमी के कारण इन घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अतः बेहतर पूर्वानुमान एवं आपदा तत्परता हेतु ऐसी घटनाओं के अनुकरण एवं समझ को सुदृढ़ करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह शोध, वर्ष 2022 के मानसून काल के दौरान भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में बादल फटने की घटनाओं का पुनरुत्पादन करने हेतु वेदर रिसर्च एंड फोरकास्टिंग (WRF) मॉडल का उपयोग करते हुए एक उच्च-विभेदन कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग तकनीक प्रस्तुत करता है। तीव्र एवं स्थानीयकृत वर्षा द्वारा चिह्नित ये चरम मौसम परिघटनाएं, क्षेत्र के जटिल भू-भाग एवं संवहनीय गतिकी के कारण पूर्वानुमानित करना कठिन हैं। इस अध्ययन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, एवं जम्मू-कश्मीर से छह प्रतिनिधि बादल फटने की घटनाओं का छह-घंटे के NCEP-FNL पुनर्विश्लेषण (reanalysis) डेटा का उपयोग कर 3 किमी के विभेदन पर अनुकरण किया गया। इस विश्लेषण में भंवरता (vorticity), संवहनीय अस्थिरता (CAPE, CINE), नमी उपलब्धता, तथा पर्वतीय उत्थान (orographic lifting) जैसे महत्वपूर्ण वायुमंडलीय तंत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। मॉडल के आउटपुट को भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), ग्लोबल प्रिसिपिटेशन मेज़रमेंट मिशन (GPM), एवं CPC मॉर्फिंग तकनीक (CMORPH) के दैनिक वर्षा डेटा के विरुद्ध सत्यापित किया गया। मॉडल ने IMD डेटा के साथ प्रबल सहसंबंध प्रदर्शित किया (सहसंबंध गुणांक 0.84 एवं RMSE 45.07 मिमी), यद्यपि उपग्रह-आधारित डेटासेट्स के साथ प्रदर्शन में भिन्नता पाई गई। यह अध्ययन उच्च-विभेदन क्षेत्रीय मॉडलिंग एवं बहु-प्रेक्षणात्मक सत्यापन का उपयोग कर बादल फटने की घटनाओं के अनुकरण को समझने में योगदान देता है।
स्रोत: https://doi.org/10.1007/s40808-025-02680-w