
डॉ. अभय ए. पशिलकर
डॉ. अभय अनंत पशिलकर भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर से एम.ई. तथा IIT खड़गपुर से बी.टेक (ऑनर्स), दोनों एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में करने के पश्चात, 1993 में राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला (नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज़) से जुड़े। उन्होंने 1998 में जर्मनी के ब्राउनश्वाइग स्थित DLR के फ्लाइट मैकेनिक्स संस्थान में 9 माह तक अतिथि वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। उन्होंने 2002 में IISc से पीएचडी प्राप्त की। पशिलकर 2003 से 2005 तक अपनी पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप हेतु सिंगापुर की NTU से जुड़े रहे।
प्रथम दशक 1993 से 2003: डॉ. पशिलकर फ्लाइट मैकेनिक्स एवं कंट्रोल डिवीजन (FMCD) में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट परियोजना हेतु नेशनल कंट्रोल लॉ टीम (NCT) का हिस्सा थे। इस अवधि के दौरान, उनकी जिम्मेदारियों में LCA वायुसेना एवं नौसेना संस्करणों हेतु इंजीनियर-इन-द-लूप-सिम्युलेटर (ELS) को अद्यतन एवं संधारित करना शामिल था। इस गतिविधि में LCA की विभिन्न उपप्रणालियों की मॉडलिंग एवं सिमुलेशन पर कार्य शामिल था। LCA के उच्च आक्रमण कोण (एंगल ऑफ अटैक) एवं स्पिन लक्षण वर्णन पर व्यापक कार्य किया गया। इसी अवधि में, उन्होंने NAL के अन्य प्रभागों के साथ स्मार्ट संरचनाओं (सक्रिय कंपन नियंत्रण), रिमोट-नियंत्रित ब्लिम्प/एयरशिप के नियंत्रण डिज़ाइन, HAL के 8मी x 4मी ऑटोक्लेव के नियंत्रण, तथा SARAS ऑटोपायलट एवं स्टॉल चेतावनी प्रणाली विकास के क्षेत्रों में कार्य किया। उन्होंने एकीकृत फ्लाइट-प्रोपल्शन नियंत्रण की दिशा में एक एयरो-थर्मोडायनामिक इंजन मॉडल विकसित करने हेतु जूनियर रिसर्च फेलो का मार्गदर्शन किया। अपने पोस्ट-डॉक्टोरल शोध के दौरान, उन्होंने विमान नियंत्रण प्रणालियों के पुनर्विन्यास हेतु अनुकूली बैक-स्टेपिंग न्यूरल नेटवर्क्स पर आधारित एक नवीन नियंत्रण रणनीति विकसित की। बाद में, सहकर्मियों द्वारा इस कार्य को संपूर्ण फ्लाइट एन्वेलप में उच्च-प्रदर्शन लड़ाकू विमानों के नियंत्रक डिज़ाइन तक विस्तारित किया गया, जिसमें नियंत्रण सतह विफलताओं को संभालने की क्षमता भी शामिल है। उनके मार्गदर्शन में फिक्स्ड-विंग विमानों हेतु प्रथम सिद्धांतों से एक स्वचालित निम्न-गति पुनर्प्राप्ति एल्गोरिद्म विकसित किया गया है।
द्वितीय दशक 2003 से 2013: वे 2005 से 2011 तक SARAS ऑटोपायलट कार्यक्रम के उप परियोजना निदेशक रहे। 2007 से 2014 तक, वे FMCD, NAL में फ्लाइट सिमुलेशन के समूह प्रमुख रहे। उनके प्रभार अंतर्गत समूह ने SARAS फ्लाइट ट्रेनिंग डिवाइस (FTD) एवं रीजनल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (RTA) सिम्युलेटर का विकास कार्य किया। इस अवधि में, एक सहकर्मी के साथ संयुक्त रूप से हवाई यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में शोध किया गया। SARAS सिम्युलेटर में इसकी गतिकी को समाहित करने हेतु PT-6 टर्बोप्रॉप इंजन एवं प्रोपेलर संयोजन को भी मॉडल किया गया है। उन्होंने इंजीनियरिंग के मानवीय कारकों (ह्यूमन फैक्टर्स) एवं स्ट्रैपडाउन नेविगेशन एल्गोरिद्म के क्षेत्र में शोध प्रारंभ किया। वे उस बहु-विषयक (वायुगतिकी, संरचना, प्रणोदन, फ्लाइट कंट्रोल) एवं बहु-संगठनात्मक (NAL, HAL, ADA) टीम के कार्य-प्रमुख (टास्क लीडर) थे, जिसने LCA तेजस को वेक पेनिट्रेशन हेतु मंजूरी दिलाई। उनके मार्गदर्शन में एक पैरामीटर आकलन तकनीक विकसित की गई, जो वायुगतिकीय गुणांकों में सीधे अद्यतन की अनुमति देती है, तथा इस प्रकार गुणांकों में अरैखिकताओं (नॉनलीनियरिटीज़) को समाहित करती है। इस विधि का उपयोग SARAS एवं LCA जैसे विमानों के वायुगतिकीय डेटाबेस को लगभग वास्तविक-समय में उड़ान परीक्षण द्वारा अद्यतन करने हेतु किया जाता है। गेन एवं फेज़ मार्जिन के लगभग वास्तविक-समय आकलन हेतु रिकर्सिव लीस्ट स्क्वेयर्स को अनुकूलित किया गया है।
तृतीय दशक 2013 से आगे: एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) नियंत्रण नियम एवं एक फ्लाइट सिम्युलेटर, साथ ही ASTE, IAF हेतु हैंडलिंग क्वालिटीज़ सिम्युलेटर विकसित किए गए। 2015 में, उन्होंने भुज वायुसेना अड्डे पर मिग21 विमान सिम्युलेटर हेतु फ्लाइट डायनामिक मॉडल प्रदान किया। उन्होंने HAL द्वारा स्वीकृत एक परियोजना के अंतर्गत 2015 से 2018 तक नए स्टोर्स की एयरो-मैकेनिकल मंजूरी हेतु बहु-प्रभागीय मिराज परियोजना का समन्वय किया। यह एक बहु-विषयक गतिविधि है, जिसमें NAL के विभिन्न प्रभाग (फ्लाइट मैकेनिक्स एवं कंट्रोल, संरचना, विंड टनल परीक्षण, कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स, तथा फ्लाइट परीक्षण) शामिल हैं।
2018 में, उन्होंने सिस्टम्स इंजीनियरिंग डिवीजन (SysED) के संस्थापक प्रमुख का कार्यभार संभाला। यह प्रभाग NAL के SARAS Mk II एवं हंसा जैसे विमान कार्यक्रमों हेतु उत्पाद जीवनचक्र प्रबंधन (PLM), बहु-विषयक डिज़ाइन एयरक्राफ्ट ऑप्टिमाइज़ेशन (MDAO), विश्वसनीयता विश्लेषण, तथा मॉडल-आधारित सिस्टम्स इंजीनियरिंग (MBSE) समाधानों को क्रियान्वित कर रहा है। SysED, हंसा नेक्स्ट जनरेशन (NG) विमान एवं रीजनल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (RTA) के व्यवहार्यता अध्ययनों का समर्थन करता है। इसके पश्चात, इसने SARAS Mk II के विन्यास चयन हेतु प्रमुख इनपुट प्रदान किए हैं। इस प्रभाग ने हंसा एवं SARAS Mk II प्रणालियों हेतु विमान-स्तरीय विश्वसनीयता विश्लेषण तैयार किया है, तथा SARAS Mk II कॉकपिट का मानवाकृतिक (एंथ्रोपोमॉर्फिक) अध्ययन किया है। SysED ने ज़ेफायर श्रेणी के व्यवहार्य हाई ऑल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट (HAPS) के डिज़ाइन हेतु आवश्यक द्रव्यमान एवं ऊर्जा संतुलन भी निर्धारित किया है। 2019 से 2022 तक, वे NAL में कार्यक्रम निदेशक (नागरिक विमान परियोजनाएं) रहे।
डॉ. पशिलकर ने फ्लाइट डायनामिक्स एवं कंट्रोल, पैरामीटर आकलन, कंप्यूटर विज्ञान, तथा मानवीय कारकों के क्षेत्रों में छह पीएचडी तथा एक एमएस इंजीनियरिंग उम्मीदवारों का मार्गदर्शन किया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं तथा सम्मेलनों में उनके लेखक के रूप में 70 से अधिक प्रकाशन हैं। उन्हें वर्ष 2001 में "उच्च आक्रमण कोण अस्थिर वायुगतिकी के अंतर्गत विमान की हैंडलिंग हेतु नियंत्रण नियम प्रदान करने की दिशा में नियंत्रण प्रणाली डिज़ाइन में महत्वपूर्ण योगदान" के क्षेत्र में इंजीनियरिंग विज्ञान में सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें "एयरोस्पेस प्रणालियों की मॉडलिंग, विश्लेषण एवं सिमुलेशन" हेतु वर्ष 2003 का भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी (INAE) युवा इंजीनियर पुरस्कार भी प्रदान किया गया। मिराज FoC अपग्रेड परियोजना पर कार्य हेतु "लड़ाकू विमान हेतु कैरिज, हैंडलिंग एवं स्टोर रिलीज़" के लिए NAL को वर्ष 2019 का सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्कार प्राप्त हुआ।