Top Bar

सीएसआईआर-राष्ट्रीय डेटा विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता संस्थान

(पूर्व में चैथा पैरारडाइम संस्थान तथा गणितीय प्रारूपण एवं कम्प्यूटर अनुकरण केन्द्र)

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक घटक प्रयोगशाला की एक घटक प्रयोगशाला।.


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार

CSIR India Logo

डॉ. श्रीदेवी जेड ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर से इंजीनियरिंग में अपनी पीएचडी एवं स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। वे 1988 में सीएसआईआर-सीबीआरआई से जुड़ीं तथा तत्पश्चात 1993 में सीएसआईआर-4पीआई (पूर्व में सीएसआईआर-सीएमएमएसीएस) से जुड़ीं। विगत तीन दशकों से वे सीएसआईआर में अनुसंधान एवं विकास तथा प्रबंधन भूमिकाओं का निर्वहन कर रही हैं। डॉ. श्रीदेवी को भारतीय प्लेट के चुनौतीपूर्ण भू-भागों के भूकंपीय गुणों के अध्ययन हेतु ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) डेटा के अग्रणी उपयोग के लिए वर्ष 2024 का IISc विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार प्राप्त हुआ है। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उनके योगदान हेतु उन्हें राष्ट्रीय खनिज/भू-विज्ञान पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। उन्हें पृथ्वी विज्ञान में असाधारण योगदान हेतु सर सी.वी. रमन युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। उनका प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र GNSS आधारित बहु-विषयक अनुसंधान है, तथा उन्होंने कई बहु-संस्थागत नेटवर्क परियोजनाओं का संचालन किया है एवं कई राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समितियों पर कार्यरत हैं। उन्होंने AcSIR की सीनेट सदस्य के रूप में सेवा दी है तथा वर्तमान में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM), अंतरविषयक साइबर फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन (NM-ICPS), सीएसआईआर सलाहकार बोर्ड की सदस्य हैं। वे सीएसआईआर स्मार्ट कृषि-प्रौद्योगिकी मिशन की मिशन निदेशक हैं तथा वर्तमान में CLAIM (सीएसआईआर लीग फॉर एआई बेस्ड इंडस्ट्रियल मैनिफेस्टेशन) गतिविधि का संचालन कर रही हैं।


डॉ. श्रीदेवी जेड ने वर्ष 1994 से भारत में GPS (ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम) आधारित भू-विज्ञान अनुसंधान की अग्रणी शुरुआत की तथा इस क्षेत्र में एक मान्यता प्राप्त शोधकर्ता हैं। वर्षों के दौरान, उन्होंने देश भर के अत्यंत दुर्गम भू-भागों (लद्दाख, पूर्वोत्तर, अंडमान) में फैली कई बहु-संस्थागत आपदा न्यूनीकरण परियोजनाओं का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय प्लेट के आंतरिक भाग एवं सीमाओं हेतु भूपर्पटी गति एवं विकृति मॉडल के पहली बार सटीक आकलन प्राप्त हुए, जिससे भारत में बड़े भूकंपों की पुनरावृत्ति दर का पता चला। भारत में भूकंप जोखिम आकलन हेतु भूकंपीय-विवर्तनिक गतिविधि की निगरानी के लिए DST के राष्ट्रीय GPS कार्यक्रम एवं बाद में MoES के अंतर्गत GPS स्टेशनों के राष्ट्रीय नेटवर्क की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उच्च प्रभाव वाली SCI पत्रिकाओं में उनके प्रकाशन उनके शोध उत्पादन की गुणवत्ता को दर्शाते हैं, तथा उद्धरण (citations) राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में उनके शोध की वर्तमान प्रासंगिकता को इंगित करते हैं। उन्होंने साइबर सुरक्षा, भूकंप जोखिम एवं जलवायु परिवर्तन जैसे विविध वैज्ञानिक क्षेत्रों को समाहित करने वाली मेगा ट्रांसलेशनल शोध परियोजना ARiEES का भी नेतृत्व किया, जिसमें डेटा-गहन मॉडलिंग एवं क्राउड-सोर्सिंग दृष्टिकोण का उपयोग किया गया।