More Articles ...
द्वारा शिव साई कुमार राजना, संबित प्रसनजीत नाइक, संपद कुमार पांडा, चिरंजीवी जी. विवेक, श्रीदेवी जेड
भारतीय एवं सुंडा प्लेटों के अभिसरण स्थल पर स्थित म्यांमार, दक्षिण-पूर्व एशिया के सर्वाधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय एवं संरचनात्मक रूप से जटिल क्षेत्रों में से एक है। उच्च भूकंपीय जोखिम के बावजूद, इस क्षेत्र में भूकंप-संबंधी वायुमंडलीय एवं आयनमंडलीय विक्षोभों को समझने हेतु सीमित आयनमंडलीय शोध किया गया है। इस कार्य में, सक्रिय सगाइंग भ्रंश (Sagaing Fault) के अनुदिश भूकंपीय-आयनमंडलीय युग्मन की जांच हेतु 28 मार्च 2025 को मांडले के निकट आए Mw 7.7 म्यांमार भूकंप को शामिल किया गया है। GNSS-व्युत्पन्न कुल इलेक्ट्रॉन कंटेंट (TEC) डेटा का उपयोग करते हुए, यह अध्ययन सह-भूकंपीय (co-seismic) एवं पूर्व-भूकंपीय (pre-seismic) दोनों प्रकार की आयनमंडलीय विसंगतियों की पहचान करता है। एकाधिक रिसीवर-सैटेलाइट (R-S) युग्मों से लगभग 0635 UT पर चरम पर पहुंचने वाले सुसंगत, कालिक रूप से सहसंबद्ध विक्षोभ प्रकट होते हैं, जो ऊर्ध्वगामी रूप से प्रसारित भूकंप-प्रेरित ध्वनिक गुरुत्व तरंगों (AGWs) का संकेत देते हैं। अधिकेंद्र (epicenter) से दूरी बढ़ने के साथ विक्षोभ आयाम में कमी आई, तथा प्रमुख आवृत्तियां (3–5 mHz) भूकंप-प्रेरित ट्रैवलिंग आयनोस्फेरिक डिस्टर्बेंसेज़ (TIDs) के अनुरूप पाई गईं। 1.19 किमी/सेकंड की क्षैतिज प्रसार गति इन TEC विक्षोभों के ध्वनिक तरंग मूल की पुष्टि करती है। अधिकेंद्र के पश्चिमी भाग में प्रमुख आयनमंडलीय विसंगतियां दर्ज की गईं, जो भ्रंश विदर (fault rupture) क्षेत्र के अनुरूप हैं। ये स्थानीयकृत, दिशात्मक विक्षोभ स्ट्राइक-स्लिप भ्रंश गतिकी एवं आयनमंडलीय विक्षोभों के मध्य स्पष्ट युग्मन को दर्शाते हैं। भू-चुंबकीय रूप से शांत परिस्थितियों में घटना से तीन दिन पूर्व दर्ज की गई एक उल्लेखनीय क्षेत्रीय TEC कमी, लिथोस्फीयर-वायुमंडल-आयनमंडल (LAI) युग्मन का संकेत देती है, जो संभवतः तनाव-प्रेरित रेडॉन उत्सर्जन या विद्युत क्षेत्र परिवर्तनों से जुड़ी है। इन विसंगतियों का समय एवं विशेषताएं, एक प्रभावी भूकंप पूर्वसूचक के रूप में TEC निगरानी की संभावना को सुदृढ़ करती हैं। ये निष्कर्ष न केवल पूर्व- एवं उत्तर-भूकंपीय दोनों प्रकार के विक्षोभों हेतु TEC डेटा की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि विशेष रूप से अंतर-प्लेट क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक भूकंपीय नेटवर्क विरल अथवा अल्पविकसित हो सकते हैं, एक व्यवहार्य प्रारंभिक चेतावनी उपकरण के रूप में TEC-आधारित निगरानी की संभावना को भी रेखांकित करते हैं। इस प्रकार की आयनमंडलीय पूर्वसूचक पहचान, म्यांमार जैसे भूवैज्ञानिक रूप से जटिल एवं उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में भूकंपीय जोखिम पूर्वानुमान एवं तत्परता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
स्रोत: https://doi.org/10.1016/j.asr.2025.11.015
- मॉडल अनुकरण का उपयोग कर भारतीय हिमालयी क्षेत्र में बादल फटने की घटनाओं की गतिकी का अध्ययन
- 23 अप्रैल 2023 के भूचुंबकीय तूफान के दौरान EIA शिखरों की तीव्रता में गोलार्ध असममिति का तीव्र प्रत्यावर्तन: GOLD से एक अद्वितीय प्रेक्षण
- मई 2015 के दौरान ओडिशा में चरम तापमान घटनाओं के अनुकरण पर भूमि उपयोग परिवर्तन के प्रभाव का आकलन
- सन-स्काई रेडियोमीटर (POM-01) से 940 एनएम अवशोषण बैंड पर वर्षणीय जल वाष्प की पुनर्प्राप्ति: कैलिब्रेशन, मापन एवं सत्यापन
- Pre-failure-deformation characterization of 30 July, 2024 Wayanad landslide, Kerala, India
- Simulation of flood associated with extreme rainfall events over the urban city, Bengaluru, India
- Assessing the Impact of Parameter Sensitivity and Multi-Configurational Ensembles of WRF- Hydro Model on Simulated Hydro-Meteorological Variables—A Multifaceted Evaluation over Krishna River Basin of India
- Evaluation of CMIP6 multi-model ensemble for assessing the intensity and duration of Indian monsoon under future warming scenarios
- Retrieval of precipitable water vapor from sun-sky radiometer (POM-01) at 940 nm absorption band: Calibration, measurement and validation
- Mapping seismic hazards in the Himalayas